महाभारत के कुरुक्षेत्र में जब अर्जुन अपनों के सामने खड़े होकर निराशा, मोह और संशय के गहरे अंधकार में डूब गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने केवल एक सारथी नहीं, बल्कि **'जगद्गुरु'** बनकर उनका हाथ थामा था।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन के हर संशय को धैर्य से सुना, गांडीव उठाने का साहस दिया और 'श्रीमद भगवद्गीता' के रूप में जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान दिया।
हमारे जीवन में भी शिक्षक ठीक वैसे ही **'कृष्ण'** की भूमिका निभाते हैं। जब-जब हम भ्रमित होते हैं या हार मानने लगते हैं, वे अपने ज्ञान से हमारा मार्गदर्शन करते हैं और हमें कर्तव्यों के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।
आज शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर, मेरे जीवन के उन सभी गुरुओं को मेरा कोटि-कोटि नमन, जिन्होंने अर्जुन रूपी मुझ शिष्य को सही राह दिखाई। 🏹🌻