नवदुर्गा स्मरणम् एवं देवी कवच फलश्रुति | 9 Forms of Maa Durga Shloka with Meaning
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12 Oct 2026
नवदुर्गा स्मरणम् एवं देवी कवच फलश्रुति | 9 Forms of Maa Durga Shloka with Meaning
॥ श्री चण्डीकवचम् / नवदुर्गा स्मरणम् ॥
मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत श्री दुर्गा सप्तशती से उद्धृत यह पावन नवदुर्गा स्मरण और उसके उपरांत का रक्षा श्लोक समस्त प्रकार के भय, शत्रु-बाधा, शोक और संकटों का नाश करने वाला है।
॥ फलश्रुति एवं रक्षा श्लोक ॥
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।
अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे॥
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः।
न तेषां जायते किञ्चिदशुभं रणसङ्कटे॥
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥
श्लोकार्थ:
परम पिता ब्रह्मा जी द्वारा माँ दुर्गा के ये नौ नाम कहे गए हैं। अग्नि में जलता हुआ व्यक्ति, रणभूमि में शत्रुओं से घिरा हुआ मनुष्य, या किसी भी विषम व दुर्गम संकट में फंसा हुआ भयभीत साधक यदि माँ भगवती की शरण ग्रहण करता है, तो उसका कभी कोई अमंगल नहीं होता। उसे किसी भी प्रकार की विपत्ति, शोक, दुःख अथवा भय स्पर्श नहीं कर सकते।
नित्य प्रातः अथवा नवरात्र के पावन दिनों में इस श्लोक का स्मरण करने से मानसिक शांति, आत्मबल और दैवीय सुरक्षा प्राप्त होती है।
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