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शुक्रवार, 08 मई 2026

ओशो: रहस्यदर्शी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु

ओशो: रहस्यदर्शी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु

ओशो: रहस्यदर्शी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु

83 Visited Spiritual Speakers • Updated: Wednesday, 10 September 2025

ओशो: रहस्यदर्शी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु


ओशो: रहस्यदर्शी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु

ओशो (11 दिसम्बर 1931 – 19 जनवरी 1990), जिनका मूल नाम चन्द्रमोहन जैन था, आधुनिक युग के सबसे प्रभावशाली और चर्चित आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे।
उन्हें भगवान श्री रजनीश, ओशो रजनीश या केवल रजनीश के नाम से भी जाना जाता है।

प्रारंभिक जीवन

  • जन्म: कुच्वाडा, रायसेन जिला, मध्य प्रदेश

  • माता-पिता: बाबूलाल और सरस्वती जैन (तेरापंथी दिगंबर जैन परिवार)

  • बचपन का अधिकांश समय ननिहाल में बीता जहाँ उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिली।

  • विद्यार्थी काल में ही वे विद्रोही स्वभाव और स्वतंत्र सोच के लिए प्रसिद्ध हो गए।

शिक्षा और करियर

  • दर्शनशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

  • रायपुर और जबलपुर विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक रहे।

  • 1960 के दशक में वे आचार्य रजनीश के नाम से पूरे भारत में व्याख्यान देने लगे।

आध्यात्मिक यात्रा और आंदोलन

  • उन्होंने पारंपरिक धर्म, संस्थागत व्यवस्थाओं और गांधीवादी विचारों की आलोचना की।

  • मानव कामुकता और स्वतंत्रता के प्रति खुले विचार प्रस्तुत किए, जिसके कारण उन्हें "सेक्स गुरु" कहा गया।

  • 1970 में उन्होंने नव संन्यास आंदोलन की शुरुआत की।

  • 1974 में पुणे में आश्रम की स्थापना की, जो आज ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसॉर्ट के नाम से प्रसिद्ध है।

  • 1981 में वे अमेरिका गए और रजनीशपुरम नामक commune की स्थापना की।

  • कानूनी विवादों और निर्वासन के बाद 1987 में भारत लौट आए और पुणे आश्रम में जीवन का शेष समय बिताया।

निधन

19 जनवरी 1990 को पुणे आश्रम में ओशो का देहांत हुआ।
उनकी समाधि पर लिखा है:
“न जन्में, न मरे – केवल 11 दिसम्बर 1931 से 19 जनवरी 1990 तक पृथ्वी का भ्रमण किया।”

प्रमुख योगदान और साहित्य

ओशो ने हजारों प्रवचन दिए और उन पर आधारित सैकड़ों पुस्तकें प्रकाशित हुईं।
उनके विचारों का दायरा बहुत व्यापक था – उपनिषद, गीता, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, कबीर, मीरा, सूफी, ताओ, ज़ेन से लेकर तंत्र, योग, ध्यान और आधुनिक जीवन की समस्याएँ

कुछ प्रमुख कृतियाँ:

  • संभोग से समाधि की ओर

  • अष्टावक्र महागीता

  • गीता दर्शन

  • ध्यानयोग: प्रथम और अंतिम मुक्ति

  • सत्यम शिवम् सुंदरम्

  • संभोग और समाधि एक समान

ओशो की विशेषता

  • ओशो कहते थे कि मनुष्य को धर्म, राजनीति और परंपराओं के बंधन से मुक्त होकर जीना चाहिए।

  • उन्होंने ध्यान (Meditation) को जीवन का केन्द्र बताया।

  • उनके अनुसार:
    👉 “मैं धर्म नहीं सिखाता, मैं धार्मिकता सिखाता हूँ।”


✨ ओशो की शिक्षाएँ आज भी दुनिया भर में लाखों लोगों को ध्यान, प्रेम और स्वतंत्रता की राह पर प्रेरित करती हैं।


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