Malayalam Panchangam: Kerala’s Timekeeping & Cultural Soul
28 Visited Calendar • Updated: Tuesday, 23 September 2025

🌴 മലയാളം പഞ്ചാംഗം: കേരളത്തിന്റെ കാലഗണനയും സാംസ്കാരിക ഹൃദയവും
(Malayalam Panchangam: Kerala’s Timekeeping & Cultural Soul — A Detailed Blog Post in Hindi)
📜 भूमिका: मलयालम पञ्चाङ्ग — काल का केरलीय स्वरूप
“കാലമാണ് പരമശിവൻ; അതിനെ അറിയുന്നവൻ ജീവിക്കും.”
(“काल ही परमशिव है — जो उसे जानता है, वही जीवित रहता है।”)
मलयालम पञ्चाङ्ग (മലയാളം പഞ്ചാംഗം) — यह केवल तिथियों और माह का ब्यौरा नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, धर्म, कृषि, और जीवन शैली का आधारस्तंभ है। यह वह जीवंत परंपरा है जो വിഷു से लेकर ഓണം तक, തിരുവാതിര से लेकर മഹാശിവരാത്രി तक — हर पल का मार्गदर्शन करती है।
चलिए, इस अद्भुत ज्ञान प्रणाली को गहराई से समझते हैं।
📅 मलयालम पञ्चाङ्ग क्या है?
मलयालम पञ्चाङ्ग कोल्लവर्षम (കൊല്ലവര്ഷം / Kollavarsham) पर आधारित है — जिसकी शुरुआत 825 ईस्वी में मानी जाती है। इसका प्रारंभ श्रीकृष्ण के अवतरण के 10 दिन बाद — यानी “കൊച്ചു തിരുനാള്” से जोड़ा जाता है।
📌 वर्तमान वर्ष (2025) = 1200–1201 कोल्लवर्षम
(“കൊല്ലവര്ഷം 1201” — 26 आगस्त 2025 से शुरू)
यह एक चांद्र-सौर कैलेंडर है — जो चंद्रमा की गति के साथ-साथ सूर्य की स्थिति (സംക്രമം / Sankramam) को भी ध्यान में रखता है।
🧮 पञ्चाङ्ग के पाँच अंग — मलयालम में भी!
मलयालम पञ्चाङ्ग भी पाँच अंगों पर आधारित है — जिन्हें मलयालम में इस प्रकार कहा जाता है:
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तिथि |
തിഥി (Tithi) |
चंद्रमा की कला के आधार पर दिन |
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वार |
വാരം (Vaaram) |
सात दिन — ഞായര് (रविवार) से ശനി (शनिवार) |
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नक्षत्र |
നക്ഷത്രം (Nakshatram) |
27 नक्षत्र — अश्विनी से रेवती |
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योग |
യോഗം (Yogam) |
सूर्य + चंद्रमा की स्थिति का योग |
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करण |
കരണം (Karanam) |
तिथि का आधा भाग |
इनके अलावा, मलयालम पञ्चाङ्ग में “രാഹുകാലം (Rahukalam)”, “യമഗണ്ഡം (Yamagandam)”, “ഗുളികകാലം (Gulikakalam)” जैसे अशुभ समय भी विस्तार से दिए जाते हैं — खासकर शुभ कार्यों के लिए।
📆 मलयालम मास — 6 ऋतुओं के साथ
मलयालम कैलेंडर में 6 ऋतुएँ (ഋതു) और 12 मास होते हैं — प्रत्येक ऋतु में 2 मास।
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1 |
ചിങ്ങം (Chingam) |
अगस्त-सितंबर |
“ഓണം” — केरल का सबसे बड़ा त्योहार — “തിരുവോണം” नक्षत्र पर |
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2 |
കന്നി (Kanni) |
सितंबर-अक्टूबर |
नवरात्रि, विवाहों की शुरुआत |
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3 |
തുലാം (Thulam) |
अक्टूबर-नवंबर |
“തുലാം സംക്രമം”, “വൃശ്ചികം” की तैयारी |
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4 |
വൃശ്ചികം (Vrishchikam) |
नवंबर-दिसंबर |
“വൃശ്ചിക സംക്രമം”, “ഗുരുവായൂര് ഉത്സവം” |
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5 |
ധനു (Dhanu) |
दिसंबर-जनवरी |
“ധനു മാസം” — “തിരുവാതിര”, “മാകരവിളക്ക്” |
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6 |
മകരം (Makaram) |
जनवरी-फरवरी |
“മakര സംക്രമം” — “മakരവിളക്ക്”, “പൊങ്കാല” |
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7 |
കുംഭം (Kumbham) |
फरवरी-मार्च |
“കുംഭ മാസം” — “മഹാശിവരാത്രി”, “അരുവിക്കുട ഉത്സവം” |
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8 |
മീനം (Meenam) |
मार्च-अप्रैल |
“മീന സംക്രമം”, “വിഷു” की तैयारी |
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9 |
മേടം (Medam) |
अप्रैल-मई |
“വിഷു” — केरल का नव वर्ष — “വിഷുവിന്റെ കണി” |
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10 |
ഇടവം (Edavam) |
मई-जून |
“ഇടവം മാസം” — वर्षा का आगमन — “എടവപ്പൂഴി” |
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11 |
മിഥുനം (Mithunam) |
जून-जुलाई |
“മിഥുന സംക്രമം”, “ആദി” की शुरुआत |
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12 |
കർക്കടകം (Karkidakam) |
जुलाई-अगस्त |
“രാമായണ മാസം” — “കർക്കിടകവാവ്”, “ഓണം” की तैयारी |
🎉 केरल का नव वर्ष — “വിഷു (Vishu)” — मेष संक्रांति (14/15 अप्रैल) को मनाया जाता है — “വിഷുക്കണി”, “വിഷുക്കണിക്കണക്ക്” के साथ।
🎊 प्रमुख त्योहार — पञ्चाङ्ग के अनुसार
🌾 1. ഓണം (Onam) — ചിങ്ങം मास
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समय: अगस्त-सितंबर
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महत्व: राजा महाबली का स्वागत — “പുലക്കളി”, “തിരുവാതിര”, “വള്ളംകളി”
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पंचांग आधार: “തിരുവോണം നക്ഷത്രം” — ചിങ്ങം मास में
🌅 2. വിഷു (Vishu) — മേടം मास
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समय: अप्रैल (14–15)
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महत्व: केरल का नव वर्ष — “വിഷുക്കണി”, “വിഷുക്കണിക്കണക്ക്”, “കൈനെറ്റ്”
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पंचांग आधार: “മേടം 1 — മേടം സംക്രമം”
🪔 3. തിരുവാതിര (Thiruvathira) — ധനു मास
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समय: दिसंबर-जनवरी
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महत्व: माँ पार्वती का व्रत — “തിരുവാതിര കളി”, “തിരുവാതിര പൂജ”
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पंचांग आधार: “തിരുവാതിര നക്ഷത്രം”
⚔️ 4. മഹാശിവരാത്രി (Maha Shivaratri) — കുംഭം मास
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समय: फरवरी-मार्च
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महत्व: भगवान शिव की रात्रि — “ശിവരാത്രി വ്രതം”, “അഭിഷേകം”
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पंचांग आधार: “മാഘ കൃഷ്ണ ചതുര്ദ്ദശി”
🍚 5. മakരവിളക്ക് (Makaravilakku) — മakരം मास
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समय: जनवरी (14)
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महत्व: सबरीमाला में दिव्य ज्योति — “മakര സംക്രമം”
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पंचांग आधार: “മakര സംക്രമം — സൂര്യന്റെ ഉത്തരായണം”
📱 आधुनिक युग में मलयालम पञ्चाङ्ग
आज मलयालम पञ्चाङ्ग डिजिटल रूप में भी उपलब्ध है — जिससे युवा पीढ़ी भी इससे जुड़ी हुई है।
🔹 प्रमुख ऐप्स और वेबसाइट्स:
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Drik Panchang Malayalam — https://www.drikpanchang.com/malayalam/
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AstroVed Malayalam Panchangam
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Prokerala Malayalam Calendar
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Google Play Store — “Malayalam Panchangam 2025” — 50+ ऐप्स उपलब्ध
🔹 उपयोग:
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विवाह मुहूर्त चुनना — “മുഹൂര്ത്തം”
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“ഗൃഹപ്രവേശം”, “നാമകരണം”, “ചൂടാകുളം”
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व्रत — “വ്രതം”, “പൂജ”, “ഉപവാസം”
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व्यापार — “വിഷുക്കണിക്കണക്ക്” के लिए शुभ तिथि
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रोजाना “രാഹുകാലം” और “ചൗഘടിയ” चेक करना
🏛️ मलयालम पञ्चाङ्ग का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व
✅ 1. खगोलीय सटीकता
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ISRO भी लॉन्च के समय नक्षत्रों का उल्लेख करता है — जैसे “രേവതി നക്ഷത്രം”।
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“തിരുവോണം” और “വിഷു” — सूर्य की स्थिति के आधार पर तय होते हैं।
✅ 2. कृषि मार्गदर्शन
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“കർക്കിടകം” — धान्य भंडारण और आयुर्वेदिक चिकित्सा का समय
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“ഇടവം” — बुआई का समय
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“ചിങ്ങം” — कटाई और “ഓണം” उत्सव
✅ 3. आयुर्वेद और जीवन शैली
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“കർക്കിടകം” — “രാമായണ മാസം” — आध्यात्मिक पढ़ाई और उपवास
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“വിഷു” — नए साल की शुरुआत — “കണി” देखकर मन को शुभ ऊर्जा
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“തിരുവാതിര” — महिलाओं के लिए व्रत और नृत्य
✅ 4. सांस्कृतिक एकता
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केरल से लेकर लक्षद्वीप, मलेशिया, सिंगापुर तक — मलयाली समुदाय पंचांग के अनुसार ही जीता है।
📚 मलयालम पञ्चाङ्ग के प्रमुख ग्रंथ एवं रचयिता
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“മലയാളം പഞ്ചാംഗം” — ഗുരുവായൂര് പഞ്ചാംഗം, തിരുവനന്തപുരം പഞ്ചാംഗം — सबसे प्रामाणिक माने जाते हैं।
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“കേരള പഞ്ചാംഗം” — केरल सरकार द्वारा प्रकाशित — वैज्ञानिक गणना पर आधारित।
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“സൂര്യ സിദ്ധാന്തം (Surya Siddhanta Malayalam Version)” — खगोलीय गणना का आधार।
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“ആര്യഭടീയം” — आर्यभट्ट के सिद्धांतों का मलयालम अनुवाद।
🌅 निष्कर्ष: मलयालम पञ्चाङ्ग — ज्ञान, भक्ति और विज्ञान का संगम
मलयालम पञ्चाङ्ग केवल तिथियों का संग्रह नहीं — बल्कि केरल की आत्मा है। यह हमें याद दिलाता है कि:
🌿 “हम प्रकृति का हिस्सा हैं — चंद्रमा, सूर्य, नक्षत्र हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।”
आज के डिजिटल युग में भी, मलयालम पञ्चाङ्ग घर-घर में, मंदिरों में, और मोबाइल ऐप्स में — जीवित है। और ऐसा ही रहना चाहिए — क्योंकि यह हमारी संस्कृति, विज्ञान और आस्था की धरोहर है।
- Bengali Panchang: Time, Astrology & Cultural Heritage
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