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शुक्रवार, 08 मई 2026

Shree Vaishno Devi Chalisa Lyrics in Hindi | श्री वैष्णो देवी चालीसा पाठ, अर्थ और लाभ

Shree Vaishno Devi Chalisa Lyrics in Hindi | श्री वैष्णो देवी चालीसा पाठ, अर्थ और लाभ

Shree Vaishno Devi Chalisa Lyrics in Hindi | श्री वैष्णो देवी चालीसा पाठ, अर्थ और लाभ

53 Visited Chalisa Collection • Updated: Friday, 03 April 2026

Shree Vaishno Devi Chalisa Lyrics in Hindi | श्री वैष्णो देवी चालीसा पाठ, अर्थ और लाभ


Shree Vaishno Devi Chalisa
श्री वैष्णो देवी चालीसा

श्री वैष्णो देवी चालीसा

माता रानी (आदि शक्ति) की स्तुति में लिखा गया एक भक्तिपूर्ण पाठ है। यह चालीसा विशेष रूप से जम्मू के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी के मंदिर, उनकी उत्पत्ति और उनके चमत्कारों पर आधारित है।

यहाँ इसके बारे में मुख्य बातें दी गई हैं:

1. विषय-वस्तु और कहानी

चालीसा के माध्यम से भक्त माता के पूरे सफर और उनकी महिमा को याद करते हैं:

  • कटरा और बाण गंगा: इसमें उल्लेख है कि कैसे माता ने प्यासे हनुमान जी के लिए धनुष से बाण मारकर गंगा की धारा निकाली थी।
  • चरण पादुका: जहाँ माता के चरणों के निशान अंकित हैं।
  • अर्द्धकुंवारी गुफा: यहाँ माता ने नौ महीने तपस्या की थी (जैसे गर्भ में शिशु रहता है), इसलिए इसे 'गर्भ जून' भी कहा जाता है।
  • भैरों नाथ का वध: चालीसा में वर्णन है कि कैसे माता ने अहंकारी भैरों नाथ का वध किया और अंत में उसे मोक्ष का वरदान दिया।
  • तीन पिण्डियाँ: यह माता के तीन रूपों—महाकाली (शक्ति), महालक्ष्मी (धन/वैभव) और महासरस्वती (ज्ञान)—का वर्णन करती है।

2. पाठ करने का महत्व (Significance)

  • भय और संकट का नाश: माना जाता है कि जो भक्त नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं, उनके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और डर खत्म हो जाता है।
  • मनोकामना पूर्ति: 'मुँह माँगा फल' पाने के लिए श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इसे पढ़ते हैं।
  • मानसिक शांति: यात्रा के दौरान या घर पर इसके पाठ से भक्त माता के करीब महसूस करते हैं।

3. विशेष अनुष्ठान और नियम

  • समय: इसे सुबह स्नान के बाद या शाम को आरती के समय पढ़ना सबसे उत्तम माना जाता है।
  • लाल रंग का महत्व: माता को लाल रंग प्रिय है, इसलिए पाठ करते समय लाल आसन पर बैठना या लाल चुनरी चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • जयकारा: चालीसा के अंत में "जय माता दी" का जयकारा लगाना अनिवार्य माना जाता है, जो भक्तों में नई ऊर्जा भर देता है।

4. खास बात

वैष्णो देवी चालीसा केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह उन श्रद्धालुओं के लिए एक मानसिक यात्रा है जो किसी कारणवश भवन तक नहीं जा पाते। इसे पढ़ने मात्र से ही कटरा से लेकर भवन तक की पूरी यात्रा आँखों के सामने जीवंत हो उठती है।

Shree Vaishno Devi Chalisa
(श्री वैष्णो देवी चालीसा हिंदी)

॥ दोहा॥

गरुड़ वाहिनी वैष्णवी, त्रिकुटा पर्वत धाम ।
काली, लक्ष्मी, सरस्वती, शक्ति तुम्हें प्रणाम ॥

॥ चौपाई ॥

नमो: नमो: वैष्णो वरदानी, कलि काल मे शुभ कल्याणी ।
मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी, पिंडी रूप में हो अवतारी ॥

देवी देवता अंश दियो है, रत्नाकर घर जन्म लियो है ।
करी तपस्या राम को पाऊँ, त्रेता की शक्ति कहलाऊँ ॥

कहा राम मणि पर्वत जाओ, कलियुग की देवी कहलाओ ।
विष्णु रूप से कल्कि बनकर, लूंगा शक्ति रूप बदलकर ॥

तब तक त्रिकुटा घाटी जाओ, गुफा अंधेरी जाकर पाओ ।
काली-लक्ष्मी-सरस्वती माँ, करेंगी पोषण पार्वती माँ ॥

ब्रह्मा, विष्णु, शंकर द्वारे, हनुमत, भैरों प्रहरी प्यारे ।
रिद्धि, सिद्धि चंवर डुलावें, कलियुग-वासी पूजत आवें ॥

पान सुपारी ध्वजा नारीयल, चरणामृत चरणों का निर्मल ।
दिया फलित वर मॉ मुस्काई, करन तपस्या पर्वत आई ॥

कलि कालकी भड़की ज्वाला, इक दिन अपना रूप निकाला ।
कन्या बन नगरोटा आई, योगी भैरों दिया दिखाई ॥

रूप देख सुंदर ललचाया, पीछे-पीछे भागा आया ।
कन्याओं के साथ मिली मॉ, कौल-कंदौली तभी चली मॉ ॥

देवा माई दर्शन दीना, पवन रूप हो गई प्रवीणा ।
नवरात्रों में लीला रचाई, भक्त श्रीधर के घर आई ॥

योगिन को भण्डारा दीनी, सबने रूचिकर भोजन कीना ।
मांस, मदिरा भैरों मांगी, रूप पवन कर इच्छा त्यागी ॥

बाण मारकर गंगा निकली, पर्वत भागी हो मतवाली ।
चरण रखे आ एक शीला जब, चरण-पादुका नाम पड़ा तब ॥

पीछे भैरों था बलकारी, चोटी गुफा में जाय पधारी ।
नौ मह तक किया निवासा, चली फोड़कर किया प्रकाशा ॥

आद्या शक्ति-ब्रह्म कुमारी, कहलाई माँ आद कुंवारी ।
गुफा द्वार पहुँची मुस्काई, लांगुर वीर ने आज्ञा पाई ॥

भागा-भागा भैंरो आया, रक्षा हित निज शस्त्र चलाया ।
पड़ा शीश जा पर्वत ऊपर, किया क्षमा जा दिया उसे वर ॥

अपने संग में पुजवाऊंगी, भैंरो घाटी बनवाऊंगी ।
पहले मेरा दर्शन होगा, पीछे तेरा सुमिरन होगा ॥

बैठ गई माँ पिण्डी होकर, चरणों में बहता जल झर झर ।
चौंसठ योगिनी-भैंरो बर्वत, सप्तऋषि आ करते सुमरन ॥

घंटा ध्वनि पर्वत पर बाजे, गुफा निराली सुंदर लागे ।
भक्त श्रीधर पूजन कीन, भक्ति सेवा का वर लीन ॥

सेवक ध्यानूं तुमको ध्याना, ध्वजा व चोला आन चढ़ाया ।
सिंह सदा दर पहरा देता, पंजा शेर का दु:ख हर लेता ॥

जम्बू द्वीप महाराज मनाया, सर सोने का छत्र चढ़ाया ।
हीरे की मूरत संग प्यारी, जगे अखण्ड इक जोत तुम्हारी ॥

आश्विन चैत्र नवरात्रे आऊँ, पिण्डी रानी दर्शन पाऊँ ।
सेवक’ कमल’ शरण तिहारी, हरो वैष्णो विपत हमारी ॥

॥ दोहा ॥

कलियुग में महिमा तेरी, है माँ अपरंपार ।
धर्म की हानि हो रही, प्रगट हो अवतार ॥

॥ इति श्री वैष्णो देवी चालीसा संपूर्ण ॥

 


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