💰 शुभ शुक्रवारमाता लक्ष्मी – मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
शुक्रवार, 08 मई 2026

श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)

श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)

श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)

26 Visited Chalisa Collection • Updated: Sunday, 24 August 2025

श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)


श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)


॥ श्री भैरव चालीसा ॥

श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वन्दन करौं श्री शिव भैरवनाथ ॥

श्री भैरव सङ्कट हरण मङ्गल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥

जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी-कुतवाला ॥

जयति बटुक-भैरव भय हारी । जयति काल-भैरव बलकारी ॥

जयति नाथ-भैरव विख्याता । जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥

भैरव रूप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण ॥

भैरव रव सुनि ह्वै भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ॥

शेष महेश आदि गुण गायो । काशी-कोतवाल कहलायो ॥

जटा जूट शिर चन्द्र विराजत । बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥

कटि करधनी घूँघरू बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत ॥

जीवन दान दास को दीन्ह्यो । कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥

वसि रसना बनि सारद-काली । दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥

धन्य धन्य भैरव भय भञ्जन । जय मनरञ्जन खल दल भञ्जन ॥

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्श सुयश नहिं थोडा ॥

जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥

रूप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुँ लोचन ॥

अगणित भूत प्रेत सङ्ग डोलत । बं बं बं शिव बं बं बोलत ॥

रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला ॥

बटुक नाथ हो काल गँभीरा । श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥

करत नीनहूँ रूप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहँ शुभ आशा ॥

रत्न जड़ित कञ्चन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सु‍आनन ॥

तुमहि जा‍इ काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहँ दर्शन पावहिं ॥

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय । वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥

महा भीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । स्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय ॥

निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥

त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्या‍ऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥

रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥

करि मद पान शम्भु गुणगावत । चौंसठ योगिन सङ्ग नचावत ॥

करत कृपा जन पर बहु ढङ्गा । काशी कोतवाल अड़बङ्गा ॥

देयँ काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ॥

जनकर निर्मल होय शरीरा । मिटै सकल सङ्कट भव पीरा ॥

श्री भैरव भूतोङ्के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा ॥

ऐलादी के दुःख निवारयो । सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥

सुन्दर दास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥

श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो ॥

दोहा

जय जय जय भैरव बटुक स्वामी सङ्कट टार ।
कृपा दास पर कीजि‍ए शङ्कर के अवतार ॥


🔔 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें:
👉 https://www.youtube.com/channel/UC76hj0iZcKkiW1YizHs0n2Q/

📘 Facebook Page:
👉 https://www.facebook.com/DigiTatva

🌿 वेबसाइट विजिट करें:
👉 https://www.bhaktipulse.com/
👉 https://www.bhaktipulse.com/video

✨ Guest Post Invitation – Share Your Divine Wisdom

🙏 Welcome to BhaktiPulse – your spiritual companion for Aarti, Chalisa, Bhajan, Mantra, and divine stories.

🌸 Do you have spiritual knowledge, devotional content, experiences, or stories that can inspire others?

📖 We warmly invite you to contribute your valuable content and become a part of our growing spiritual community.

✨ Your content may include:

  • 🪔 Aarti, Chalisa, Mantra, Bhajan
  • 📜 Spiritual stories & life lessons
  • 🔍 Unknown facts & scientific reasons in Sanatan Dharma
  • 🌿 Ayurveda, rituals, and traditions

💡 If your content aligns with our vision, we will proudly feature it on BhaktiPulse.

📩 Submit your content or contact us here:

👉 https://www.bhaktipulse.com/contact.php

🌼 Let your words spread devotion, ज्ञान, and positivity to the world.

🙏 Join us in this divine journey!