श्री बगलामुखी चालीसा (Shree Baglamukhi Chalisa)
39 Visited Chalisa Collection • Updated: Sunday, 24 August 2025

श्री बगलामुखी चालीसा (Shree Baglamukhi Chalisa)
बगलामुखी शब्द दो शब्दों, "बगला" और "मुखी" से मिलकर बना है। बगला शब्द, वाग्ला (लगाम) का अपभ्रंश है। बगला नाम तीन अक्षरों से मिलकर बना है: व, ग, ल; 'व' अक्षर वारुणी, 'ग' अक्षर सिद्धिदा और 'ल' अक्षर पृथ्वी का प्रतीक है। अतः माता के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण इन्हें यह नाम प्राप्त हुआ।
देवी के 108 नाम हैं। उत्तर भारत में माँ बगलामुखी को पीताम्बरा के नाम से जाना जाता है। पीताम्बरा का अर्थ है, पीले या सुनहरे रंग से संबंधित देवी।
बगलमुखी देवी का प्राकट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वे हल्दी के रंग के जल से प्रकट हुई थीं। हल्दी के पीले रंग के कारण इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, देवी का स्वरूप भगवान विष्णु से संबंधित है। परिणामस्वरूप, देवी सत्वगुण संपन्न हैं और वैष्णव संप्रदाय से संबंधित हैं। हालाँकि, कुछ अन्य परिस्थितियों में, देवी को तामसिक गुणों से भी जोड़ा जाता है।
माँ बगलामुखी देवी के दस रूपों में से एक हैं। पीताम्बरा माँ बगलामुखी अष्टमहाविद्या हैं। इनकी उपासना से ऋद्धियाँ (धन, सौभाग्य, समृद्धि) और सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ या आध्यात्मिक उन्नति) दोनों प्राप्त होती हैं।
।। Shree Maa Baglamukhi Chalisa ।।
1- नमो महाविधा बरदा , बगलामुखी दयाल ।
स्तम्भन क्षण में करे , सुमरित अरिकुल काल ।।
2- नमो नमो पीताम्बरा भवानी , बगलामुखी नमो कल्यानी ।।
भक्त वत्सला शत्रु नशानी , नमो महाविधा वरदानी ।।
3- अमृत सागर बीच तुम्हारा , रत्न जड़ित मणि मंडित प्यारा ।
स्वर्ण सिंहासन पर आसीना , पीताम्बर अति दिव्य नवीना ।।
4- स्वर्णभूषण सुन्दर धारे , सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे ।
तीन नेत्र दो भुजा मृणाला, धारे मुद्गर पाश कराला ।।
5- भैरव करे सदा सेवकाई , सिद्ध काम सब विघ्न नसाई ।
तुम हताश का निपट सहारा , करे अकिंचन अरिकल धारा ।।
6- तुम काली तारा भुवनेशी ,त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी ।
छिन्नभाल धूमा मातंगी , गायत्री तुम बगला रंगी ।।
7- सकल शक्तियाँ तुम में साजें, ह्रीं बीज के बीज बिराजे ।
दुष्ट स्तम्भन अरिकुल कीलन, मारण वशीकरण सम्मोहन ।।
8- दुष्टोच्चाटन कारक माता , अरि जिव्हा कीलक सघाता ।
साधक के विपति की त्राता , नमो महामाया प्रख्याता ।।
9- मुद्गर शिला लिये अति भारी , प्रेतासन पर किये सवारी ।
तीन लोक दस दिशा भवानी , बिचरहु तुम हित कल्यानी ।।
10- अरि अरिष्ट सोचे जो जन को ,बुध्दि नाशकर कीलक तन को ।
हाथ पांव बाँधहु तुम ताके,हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके ।।
11- चोरो का जब संकट आवे , रण में रिपुओं से घिर जावे ।
अननाल अनिल बिप्लव घहरावे , वाद विवाद न निर्णय पावे ।।
12- मूठ आदि अभिचारण संकट . राजभीति आपत्ति सन्निकट ।
ध्यान करत सब कष्ट नसावे , भूत प्रेत न बाधा आवे ।।
13- सुमरित राजव्दार बंध जावे ,सभा बीच स्तम्भवन छावे ।
ग सर्प ब्रर्चिश्रकादि भयंकर , खल विहंग भागहिं सब सत्वर ।।
14- सर्व रोग की नाशन हारी, अरिकुल मूलच्चाटन कारी ।
स्त्री पुरुष राज सम्मोहक , नमो नमो पीताम्बर सोहक ।।
15- तुमको सदा कुबेर मनावे , श्री समृद्धि सुयश नित गावें ।
शक्ति शौर्य की तुम्हीं विधाता , दुःख दारिद्र विनाशक माता ।।
16- यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता , शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता ।
पीताम्बरा नमो कल्यानी , नमो माता बगला महारानी ।।
17- जो तुमको सुमरै चितलाई ,योग क्षेम से करो सहाई ।
आपत्ति जन की तुरत निवारो , आधि व्याधि संकट सब टारो ।।
18- पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी, अर्थ न आखर करहूँ निहोरी ।
मैं कुपुत्र अति निवल उपाया , हाथ जोड़ शरणागत आया ।।
19- जग में केवल तुम्हीं सहारा , सारे संकट करहुँ निवारा ।
नमो महादेवी हे माता , पीताम्बरा नमो सुखदाता ।।
20- सोम्य रूप धर बनती माता , सुख सम्पत्ति सुयश की दाता ।
रोद्र रूप धर शत्रु संहारो , अरि जिव्हा में मुद्गर मारो ।।
21- नमो महाविधा आगारा, आदि शक्ति सुन्दरी आपारा ।
अरि भंजक विपत्ति की त्राता, दया करो पीताम्बरी माता ।।
22- रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल ।
मेरी सब बाधा हरो, माँ बगले तत्काल ।।
।। इति Shree Maa Baglamukhi Chalisa पाठ समाप्त ।।
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