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गुरुवार, 07 मई 2026

शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग और विधि | Sharad Navratri Calendar in Hindi

शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग और विधि | Sharad Navratri Calendar in Hindi

शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग और विधि | Sharad Navratri Calendar in Hindi

56 Visited Festival • Updated: Saturday, 13 September 2025

शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग और विधि | Sharad Navratri Calendar in Hindi


शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग और विधि | Sharad Navratri Calendar in Hindi

“जब शरद ऋतु की शांति में देवी की नौ रूपों का आगमन होता है…
तब अंधकार का विनाश होता है,
और आत्मा में शक्ति का प्रकाश जगता है।”


शारदीय नवरात्रि 2025: पूरा विवरण

शारदीय नवरात्रि 2025 का आयोजन 22 सितंबर, 2025 (सोमवार) से शुरू हो रहा है और 1 अक्टूबर, 2025 (बुधवार) को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा।

यह भारत के सभी राज्यों में विशेष रूप से उत्तर और पूर्वी भारत में भक्ति और उत्सव के साथ मनाया जाता है। इस नौ दिनों के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है — प्रत्येक दिन एक अलग रूप के साथ, एक अलग रंग के साथ, और एक अलग शक्ति के साथ।

इस पोस्ट में, हम आपको पूरा कैलेंडर, दिनवार देवी मूर्ति, रंग, विधि, महत्व और रहस्य समझाएँगे — ताकि आप इस नवरात्रि को पूर्ण भक्ति और ज्ञान के साथ मना सकें!


🗓️ शारदीय नवरात्रि 2025: दिनवार कैलेंडर

 

1

22 सितंबर (सोमवार)

शैलपुत्री

सफेद

घटस्थापना (कलश स्थापना)

2

23 सितंबर (मंगलवार)

ब्रह्मचारिणी

लाल

चंद्र दर्शन, ब्रह्मचारिणी पूजा

3

24 सितंबर (बुधवार)

चंद्रघंटा

रॉयल नील

सिंदूर तृतीया, चंद्रघंटा पूजा

4

25 सितंबर (गुरुवार)

कुश्मांडा

पीला

पूजा और उपवास

5

26 सितंबर (शुक्रवार)

स्कंदमाता

हरा

पूजा और उपवास

6

27 सितंबर (शनिवार)

कात्यायनी

भूरा

पूजा और उपवास

7

28 सितंबर (रविवार)

कालरात्रि

नारंगी

सरस्वती आह्वान, कालरात्रि पूजा

8

29 सितंबर (सोमवार)

महागौरी

गुलाबी

सरस्वती पूजा, दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा

9

30 सितंबर (मंगलवार)

सिद्धिदात्री

नीला

महानवमी पूजा, कन्या पूजन

10

1 अक्टूबर (बुधवार)

दुर्गा (महिषासुर मर्दिनी)

लाल

विजयादशमी, विसर्जन

नोट: यह कैलेंडर भारतीय पंचांग के अनुसार तैयार किया गया है। आपके स्थान के अनुसार समय थोड़ा भिन्न हो सकता है — अपने स्थानीय पंचांग की जाँच करें।


🌈 नवरात्रि के दिनों के रंग: भावनाओं का प्रतीक

हर दिन का रंग केवल सजावट नहीं — यह देवी की ऊर्जा और आपके आंतरिक विकास का प्रतीक है। इन रंगों को पहनकर आप देवी के साथ जुड़ते हैं:

 

1. शैलपुत्री

सफेद

शुद्धता, शांति, निर्मलता — नई शुरुआत का प्रतीक

2. ब्रह्मचारिणी

लाल

ऊर्जा, साहस, निष्ठा — तपस्या और अहंकार का नाश

3. चंद्रघंटा

रॉयल नील

शांति, दृढ़ता, शक्ति — चंद्रमा की शांत शक्ति

4. कुश्मांडा

पीला

खुशी, उत्साह, ज्ञान — ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्रोत

5. स्कंदमाता

हरा

विकास, समरसता, जीवन — मातृत्व की अनंत शक्ति

6. कात्यायनी

भूरा

संतुलन, स्थिरता, विनम्रता — शक्ति का संयमित रूप

7. कालरात्रि

नारंगी

उत्साह, बहादुरी, अंधकार का विनाश — राक्षसों का नाश

8. महागौरी

गुलाबी

प्रेम, करुणा, शुद्धता — आत्मा की शुद्धि

9. सिद्धिदात्री

नीला

ज्ञान, बुद्धि, सिद्धि — सभी सिद्धियों की दात्री

10. विजयादशमी

लाल

विजय, अंतिम जय, धर्म की जीत — अच्छाई का अंतिम विजय

💡 टिप: इन रंगों को अपने कपड़ों, माला, फूल या घर की सजावट में शामिल करें — आपकी भक्ति और ऊर्जा दोनों बढ़ जाएंगी!


🙏 दिनवार पूजा और महत्वपूर्ण अनुष्ठान

1. घटस्थापना — 22 सितंबर (सोमवार)

  • सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान — नवरात्रि की शुरुआत।

  • एक कलश (घट) में जल, अक्षत, तिल, नारियल और देवी की आकृति स्थापित की जाती है।

  • इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है — जिसमें देवी का समावेश होता है।

  • मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विक्रमण्टै स्वाहा”

2. चंद्र दर्शन — 23 सितंबर (मंगलवार)

  • चंद्रमा के दर्शन के बाद ही उपवास तोड़ा जाता है।

  • चंद्रमा की शांत ऊर्जा से शरीर और मन को शुद्ध किया जाता है।

3. सिंदूर तृतीया — 24 सितंबर (बुधवार)

  • विवाहित महिलाएँ अपने पति के माथे पर सिंदूर लगाती हैं — उनकी लंबी आयु के लिए।

  • यह शुभ और आशीर्वाद का प्रतीक है।

4. कन्या पूजन — 30 सितंबर (मंगलवार)

  • नौ छोटी लड़कियों (2–10 वर्ष) को देवी का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है।

  • उन्हें नए कपड़े, खाना, दक्षिणा दी जाती है।

  • महत्व: ये लड़कियाँ शुद्धता, निष्ठा और देवी की शक्ति के प्रतीक हैं।

5. संधि पूजा — 29 सितंबर (सोमवार)

  • अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के प्रथम 24 मिनट — इस अवधि को “संधि काल” कहते हैं।

  • इस अवधि में दुर्गा अष्टमी और महानवमी की पूजा एक साथ की जाती है — यह सबसे शक्तिशाली पूजा है।

  • मंत्र: “ॐ दुर्गायै विद्महे चंडायै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्”

6. विजयादशमी — 1 अक्टूबर (बुधवार)

  • नवरात्रि का अंतिम दिन, जब देवी का विसर्जन होता है।

  • देवी की मूर्ति को नदी, समुद्र या तालाब में बहाया जाता है — जिसका अर्थ है:

    “देवी अपने आकाशीय निवास लौट रही हैं — लेकिन उनकी शक्ति हमारे दिलों में बसी है।”

  • इस दिन राम ने रावण को मारा, और हनुमान ने लंका जलाई — इसलिए इसे दुश्हरा भी कहते हैं।


🎉 नवरात्रि के अन्य महत्वपूर्ण रिवाज

 

उपवास (Fast)

नौ दिनों तक सात्विक भोजन लें — नमक, नींबू, दूध, फल, शहद, गेहूं के आटे का उपयोग करें।

पूजा और हवन

रोज़ सुबह-शाम देवी की पूजा करें। घर में दीपक जलाएँ।

गरबा-डांडिया

गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में रात को नाच-गाने का उत्सव।

दुर्गा पूजा

पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में इसे पांच दिनों तक मनाया जाता है।

महलया (21 सितंबर)

नवरात्रि से पहले का दिन — जब पितृ देवताओं को स्मरण किया जाता है।


🌿 नवरात्रि का आध्यात्मिक सार

“नवरात्रि केवल देवी की पूजा नहीं — यह आपके अंदर की नौ शक्तियों की जागृति है!”

  • शैलपुत्री → अपनी जड़ों को याद करें

  • ब्रह्मचारिणी → अपने लक्ष्य के लिए समर्पित हों

  • चंद्रघंटा → अपनी शक्ति को संयमित रखें

  • कुश्मांडा → अपने अंदर की ऊर्जा को जगाएँ

  • स्कंदमाता → मातृत्व की भावना को विकसित करें

  • कात्यायनी → अपने विचारों को संतुलित करें

  • कालरात्रि → अपने डर को तोड़ें

  • महागौरी → अपनी आत्मा को शुद्ध करें

  • सिद्धिदात्री → अपनी सभी क्षमताओं को प्रकट करें


📌 नवरात्रि 2025: आपके लिए एक छोटा सा टिप्स

 

रंग वाले कपड़े पहनें

हर दिन उस दिन के रंग का कपड़ा पहनें — आपकी ऊर्जा बदल जाएगी।

रोज़ 108 बार ‘ॐ दुर्गायै नमः’ जाप करें

देवी की कृपा के लिए सरल और शक्तिशाली मंत्र।

अपने घर में दीपक जलाएँ

अंधकार का नाश, ज्ञान का प्रकाश।

किसी गरीब को भोजन दें

देवी की सेवा का सबसे बड़ा रूप।

नवरात्रि के बाद अपना लक्ष्य लिखें

देवी ने आपको शक्ति दी — अब उसका उपयोग करें।


नवरात्रि के लिए शुभ मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विक्रमण्टै स्वाहा  
(देवी की सर्वशक्ति का मंत्र)

ॐ दुर्गायै विद्महे चंडायै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्  
(संधि पूजा के लिए)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विक्रमण्टै स्वाहा  
(सिद्धिदात्री के लिए)

 


निष्कर्ष: शारदीय नवरात्रि — आपकी आत्मा का उत्सव

यह नौ दिन आपके लिए एक आध्यात्मिक अभ्यास है —
जिसमें आप अपने अंदर के अहंकार, डर, लालच और अज्ञान को तोड़कर,
शुद्धता, शक्ति, ज्ञान और विजय की ओर बढ़ते हैं।

“जो देवी के साथ जुड़ता है — वह अंधकार से नहीं, उसके अंदर से निकल जाता है।”




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