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गुरुवार, 07 मई 2026

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 2026: दक्षिण का काशी और भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 2026: दक्षिण का काशी और भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 2026: दक्षिण का काशी और भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग

102 Visited 12 Jyotirlingas • Updated: Friday, 03 April 2026

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 2026: दक्षिण का काशी और भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग


रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग: दक्षिण का पवित्र शिव स्थल

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें स्थान पर आता है। इसे ‘दक्षिण का काशी’ कहा जाता है और यह हिंदुओं के चार धामों (बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम) में से एक है। यहाँ का धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और वास्तुकला इसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।


1. पौराणिक कथा: भगवान राम और शिवलिंग की स्थापना

रामायण के अनुसार, श्रीराम ने लंका विजय के बाद रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए यहाँ शिवलिंग की स्थापना की।

  • ब्रह्म हत्या का प्रायश्चित: रावण एक ब्राह्मण होने के कारण उसके वध का पाप श्रीराम पर लगा। ऋषियों ने उन्हें शिवलिंग स्थापना कर पूजा करने की सलाह दी।

  • हनुमान जी की प्रतीक्षा: श्रीराम ने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने के लिए भेजा।

  • माता सीता का रेत का लिंग: हनुमान जी देर होने पर माता सीता ने समुद्र की रेत से शिवलिंग बनाया, जिसे रामलिंग कहा गया।

  • विश्वलिंग: हनुमान जी द्वारा लाया गया लिंग भी मंदिर में स्थापित किया गया। आज भी पूजा में विश्वलिंग पहले और रामलिंग बाद में पूजा की जाती है।


2. इतिहास और वास्तुकला

  • विश्व का सबसे लंबा गलियारा: रामेश्वरम मंदिर का गलियारा लगभग 4000 फीट लंबा है और इसमें 1212 नक्काशीदार खंभे हैं।

  • पांड्य और चोल वंश: मंदिर के निर्माण में पांड्य राजाओं और श्रीलंका के जाफना के राजाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा।

  • मराठा प्रभाव: 18वीं शताब्दी में तंजौर के मराठा राजाओं ने मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया।


3. मंदिर की प्रमुख विशेषताएं

  • 22 पवित्र कुंड (The 22 Wells): मंदिर परिसर में 22 कुएं हैं, जिनके जल में औषधीय गुण माने जाते हैं। दर्शन से पहले भक्त इन कुंडों में स्नान करते हैं।

  • अग्नि तीर्थम: समुद्र तट के पास स्थित यह तीर्थम सबसे पहले श्रद्धालुओं द्वारा स्नान के लिए उपयोग किया जाता है।


4. मंदिर के दर्शन और आरती का समय

  • पट खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे

  • मणि दर्शन: सुबह 5:00 – 6:00 बजे, भगवान शिव के 'मणि' रूप के दर्शन अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

  • सामान्य दर्शन: सुबह 6:00 – दोपहर 1:00 और शाम 3:00 – रात 9:00

  • अभिषेक: सुबह 6:00 – दोपहर 12:00 बजे


5. धार्मिक महत्व

  • रामेश्वरम को शैव और वैष्णव मतों का संगम स्थल माना जाता है।

  • भगवान राम ने महादेव की पूजा की, इसलिए यह स्थान काशी यात्रा की पूर्णता के लिए अनिवार्य माना जाता है।

  • मान्यता है कि रामेश्वरम में दर्शन करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति आसान होती है।


निष्कर्ष

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग न केवल एक धार्मिक तीर्थस्थल है, बल्कि पौराणिक कथा, औषधीय कुंड और भव्य वास्तुकला इसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं। यहाँ भक्त भक्ति, शांति और पाप मोचन का अनुभव प्राप्त करते हैं।


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