वैशाख अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पितृ तर्पण, स्नान-दान और धार्मिक महत्व
96 Visited Festival • Updated: Friday, 03 April 2026

वैशाख अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और धार्मिक परंपराएं
वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है क्योंकि इसे पितृ तर्पण और श्राद्ध कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह अमावस्या और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि माना जाता है कि इसी माह से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था।
वैशाख अमावस्या 2026: तिथि और मुहूर्त
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विवरण |
समय |
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अमावस्या तिथि प्रारंभ |
16 अप्रैल 2026, रात्रि 08:11 बजे |
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अमावस्या तिथि समाप्त |
17 अप्रैल 2026, शाम 05:21 बजे |
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स्नान-दान का समय |
17 अप्रैल, सूर्योदय के बाद (सुबह 05:39 बजे से) |
इस दिन का शुभ मुहूर्त और समय धार्मिक कर्मकांड और व्रत हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व
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पितृ तर्पण
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इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
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पितृ दोष से मुक्ति पाने और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का यह श्रेष्ठ अवसर होता है।
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पवित्र स्नान
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गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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स्नान से शरीर और मन शुद्ध होते हैं, और पापों का नाश होता है।
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शनि जयंती (दक्षिण भारत)
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दक्षिण भारत में इसी दिन शनि जयंती मनाई जाती है।
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इस अवसर पर भगवान शनि की पूजा करने से जीवन में बाधाओं का नाश होता है और शनि की कृपा प्राप्त होती है।
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काल सर्प दोष निवारण
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन विशेष पूजा और उपाय करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
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इसके लिए तर्पण, हवन और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है।
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क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।
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भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप करें।
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जरूरतमंदों को सत्तू, जल से भरा घड़ा या भोजन दान करें।
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पितृ तर्पण और पिंडदान की विधि के अनुसार श्राद्ध करें।
क्या न करें:
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तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से परहेज करें।
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बाल या नाखून न काटें।
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किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन) करने से बचें।
वैशाख अमावस्या पर विशेष उपाय और पूजा
BhaktiPulse पर इस पावन दिन के लिए विस्तृत सामग्री उपलब्ध है:
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अमावस्या की व्रत कथा
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व्रत कथा पढ़कर इसका महत्व समझना और उसका पालन करना श्रेष्ठ माना जाता है।
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पितृ तर्पण की सरल विधि
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घर पर या नदी किनारे किए जाने वाले पितृ तर्पण की चरणबद्ध विधि यहाँ देखी जा सकती है।
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यह विधि सरल होने के साथ-साथ पूर्ण धार्मिक मान्यता के अनुसार है।
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दान और पुण्य लाभ
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अमावस्या के दिन किए गए दान और व्रत से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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विशेष रूप से भोजन, जल, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान अत्यंत फलदायी माना गया है।
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वैशाख अमावस्या 2026 केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है, बल्कि यह पितृ तर्पण, स्नान, दान और पुण्य प्राप्ति का दिव्य अवसर है। इस दिन किए गए कर्म जीवन में स्थायी लाभ देते हैं।
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स्नान और दान से आत्मिक शुद्धि और पितृ दोष निवारण होता है।
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भगवान विष्णु और शनि देव की पूजा से जीवन में समृद्धि, सुख और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
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इस दिन तामसिक क्रियाओं से बचना और दान-पुण्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
वैशाख अमावस्या का पालन करके व्यक्ति न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थायी लाभ प्राप्त करता है।
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